STORYMIRROR

Aman Upadhyay

Others

3  

Aman Upadhyay

Others

सवेरा

सवेरा

1 min
224

उदय हुआ सूरज पूरब में

आसमान में छाई लाली

रही ना रात ना रहा अंधेरा

रही न चंदा की उजियारी।


डाल डाल पर बैठे पक्षी

चहचह - चहचह चहक रहे हैं

खिले फूल मुस्काई कलियाँ

सारे उपवन महक रहे हैं


हवा बह रही धीमी - धीमी

शीतल और सुखदाई

जाग गए हैं खेत बाग वन

पेड़ ले रहे हैं अंगड़ाई


कण कण पर बिखरे हैं मोती

कण कण पर बिखरी हैं मणया

कितनी मनोहर कितनी सुंदर

सुखद सुहानी ये घड़ियां


Rate this content
Log in

More hindi poem from Aman Upadhyay