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मातृभूमि
मातृभूमि
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© Nidhi Jha

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हे मातृभूमि हे करूणामयी, मैं कैसे भार चुकाऊँगा , तुमसे जनमा हूँ , पला बढा, विलय तुममें हाे जाऊँगा |

ईश्वर की क्या करूणा थी, कि जन्म हुआ तेरी भूमि पर| हे मातृभूमी , हे आनंदी, शत शत नमन, शत शत नमन| 

गाैद में तेरी खेला हूँ, माटी का है स्वाद लिया, हाय वाे बचपन कैसा था, माटी स्वरूप वाे अमृत था|

अन्न इत्यादि की बात ही क्या, तू श्वास श्वास में बहती थी, रक्त धमनियाें में रज बनकर, उन्हेंं ऊजयिुक्त तू करती थी |

हे मातृभूमि हे आनंदी, मैं कैसे भार चुकाऊँगा|

मैं गिरता उठता तेरी भूमि पर, तेरी माटी मलहम बनती थी, मैं खोया रहता अपनी धुन में, तू प्रतिपल देखती रहती थी|

हे मातृभूमि हे आनंदी , मैं कैसे भार चुकाऊँगा |

हे मातृभूमि मैं तुम्हारा भार कैसे चुका पाऊँगा|

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