Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
तुम
तुम
★★★★★

© Bhavna Bhatt

Others

1 Minutes   6.5K    3


Content Ranking

 तुम हो कि
अपनी हरकतों से
मुझ  में बसी स्त्री को जगा देते हो
और कहते हो
तुम इन सब में से एक हो फिर भी मेरे पास हो...
तुम खास हो
 
तुम हो कि
मुझ  में सोयी श्वेत किरणों को
छूकर बदल देते हो रंगो में
और कहते हो
तुम मेरी प्रकृति हो...
तुम खास हो
 
तुम हो कि
फूलों की नज़ाकत लिये
मेरे मन के कोने कोने को
कुरेद देते हो
और फिर टपकते दर्द को
खुद में समाये कहते हो
तुम मेरी आस हो...
खास हो
 
तुम हो कि 
धुँध की तरह आकर 
बादलों को मुझमें रोप देते हो
फिर बरसती बारिश में
भीगते रहते हो  मेरे साथ
और कहते हो कि
तुम ही मेरी कविता हो....
तुम खास हो

ख़ास प्रकृति श्वेत

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..