वहीं एक किनारे अपनी ज़िम्मेदारियों के बोझ को अपने कंधों पर लिए आज भी खड़ा था वहीं एक किनारे अपनी ज़िम्मेदारियों के बोझ को अपने कंधों पर लिए आज भी खड़ा था