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Preeti Mishra

Others

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समर्पण

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 मम्मी अमित अंकल को फ़ोन लगाओ ना , प्लीज़ । अथर्व ने रट लगा रखी है । अभी दो दिन ही तो हुए हैं छुट्टियाँ शुरू हुए , आभा खिजते हुए कहती है ।वो भी क्या करे , हम दोनों तो आफिस चले जाते हैं, वो तो अच्छा है प्रोफ़ेसर साहब यहाँ के चक्कर लगा लेते हैं, शैलेष ने कहा ।तभी डोर बेल बजती है और ये क्या अमित हर बार की तरह ढेरों तोहफ़े ले आया है । अथर्व, उत्साह के साथ अमित के गले लग जाता है और एक एक करके सारे तोहफ़े खोलने लगता है ।

कॉलेज में भी अमित, आभा को अनगिनत तोहफ़े दिया करता था, जब वो अपनी बड़ी बड़ी आँखें घुमा घुमा कर बातें करती , तो उसे अपलक देखा करता था ।तब भी हास्टल की सारी लड़कियों के बीच अमित और आभा की दोस्ती चर्चा का विषय थी । शायद, आभा को भी अंदाज़ा था कि अमित की तरफ़ से ये सिर्फ़ दोस्ती भर नहीं है । कालेज में सबको आभा और शैलेष के संबंध का पता था , जो उस समय दूर किसी शहर में अपनी ट्रेनिंग कर रहा था । फिर भी, न जाने क्यों अमित, आभा की ओर सम्मोहित सा रहता था आभा ने अमित को कभी कोई आश्वासन नहीं दिया था, अमित ने पूछा ही नहीं था। पूछता भी कैसे, सब कुछ जानते हुए कुछ कहने का प्रश्न ही नहीं उठता था।और, अपने प्रेम के आस पास बने रहने के सुख से , वह वंचित भी तो नहीं होना चाहता था।पता नहीं शैलेष को कभी भी अमित की उपस्थिति से कोई आपत्ति क्यूँ नहीं हुई? या , यदि हुई भी हो तो उन्होंने उसे प्रदर्शित नहीं किया ।परन्तु, अमित अपनी भावनाओं के साथ समझौता नहीं कर सका और आज भी एकाकी जीवन जी रहा है । 


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