परोपकार का फल
परोपकार का फल
पास के गाँव में रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह हमेशा दूसरो की मदद करता था, स्वभाव से अति दयालू था।
एक दिन ऑफिस जाते समय उसे एक बुढ़ी महिला मिली। उनको बस से अपने बेटे के घर जाने की अति आवश्यकता था। रामू ने अपनी टिकट उनको दे दिया।
बुढ़िया बहुत ही खुश हो कर उसे धन्यवाद करने लगी। रामू उस दिन ऑफिस देर से पहुंचा लेकिन उस बुढ़ी महिला की मदद कर उसे अत्यंत खुशी हो रही थी।
एक दिन अचानक उसे अपने पिता के मृत्यु के बारे में पता चला। उसके ऑफिस से गाँव वापस जाने की टिकट नहीं थी। तभी उसे वही बुढ़िया मिलती है , वे रामू को उसके कठिन समय में टिकट देकर उसकी सहायता करती है।
अतः हमें दूसरों की मदद निस्वार्थ मन से करनी चाहिए क्योंकि जब हम निस्वार्थ रूप से किसीकी मदद करते है तो मन को शांति मिलती है। हमें अपने आप पर विश्वास रखना चाहिए और सदैव अच्छे कार्य करने चाहिए।
