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Himanshu Kumar

Children Stories Action Thriller

3  

Himanshu Kumar

Children Stories Action Thriller

Prisha : An electric girl chapter 1

Prisha : An electric girl chapter 1

6 mins
370

मंसूरी 1998 शादी के फंक्शन में एक आदमी कार की बोनट पर बैठा गुनगुना रहा था। तभी पीछे से आवाज आती है “हरि ”।

जैसे ही हरि पीछे घूमता है सामने से ब्लैक कोट पेंट पहने एक आदमी तेजी से भागता हुआ उसके पास आता है और उसे गाड़ी निकलने को कहता है। (ये है मसूरी के सबसे बड़े बिज़नस मैन वेद, इनके परिवार में सिर्फ इनकी पत्नी कृतिका है, जो प्रेगनेंट है। ) वेद अपने किसी रिश्तेदार की शादी में आया था पर अचानक से कृतिका की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें निकलना पड़ा।

वेद – “हरि जल्दी करो कृतिका की तबीयत बिगड़ी जा रही है हमें जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुचना होगा। “

हरि -“आप परेशां मत होइए सर मई अभी गाड़ी निकालता हूँ।”

उसके बाद हरि गाड़ी ले के पहुँचता है। वेद कृतिका को लेने शादी के हॉल में वापस जाता है। थोड़ी देर में वेद कृतिका को सहारा देते हुए लेकर आता है और फिर सब कार में बैठ कर हॉस्पिटल के लिए निकल जाते है।

थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर अचानक से मौसम बदलने लगता है और थोड़ी देर में बहुत जोरों से बारिश होने लगती है। ऐसे मौसम में पहाड़ी रास्ते पर गाड़ी चलने में मुश्किल हो रही थी। तभी अचानक हरि गाड़ी पर से अपना कण्ट्रोल खो देता है और गाड़ी लहराने लगती है। ये सब देखकर वेद हरि को गाड़ी ठीक से चलने को बोलता है पर हरि वेद की बात को सुन के भी अनसुना कर देता है और चलती गाड़ी से बाहर कूद जाता है। इससे पहले वेद कुछ कर पाता गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है।

हरि उठकर अपनी जगह पर खड़ा होता है और कहता है “आजकल की दुनिया में किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए सर जी, ये दुनिया बस पैसो की भाषा जानती है इंसानियत की नहीं जैसे की मैं। मैंने भी सिर्फ पैसो के लिए इतना बड़ा रिस्क लिया। अब आप अपने परिवार के साथ लम्बी छुट्टी पर ऊपर स्वर्ग में जाइये और मैं यहाँ ऐशो आराम की जिंदगी बिताऊंगा। भगवान आपकी आत्मा को शांति दे। ”

इतना कहकर हरि जैसे पीछे पलटकर जाने लगता है तभी एक तेजी रफ्तार से आती हुयी गाड़ी हरि को टक्कर मारते हुए आगे निकल जाती है।


सिटी हॉस्पिटललाल साड़ी पर सफ़ेद कोट पहने एक ३५ वर्षीय महिला हॉस्पिटल के कोरिडोर से ऑपरेशन रूम में इंटर करते ही ऑपरेशन की तैयारी कर रहे डॉक्टर से कहती है ” लीव थे केस डॉक्टर माथुर “

डॉ माथुर, ”ये आप क्या कह रही है डॉ स्मिता ? की मैं ये केस छोड़ दूँ पर क्यों ?’

डॉ स्मिता,” आप काफी इमोशनल हो रहे है। आप मेरे सीनियर है और मैं आपकी रेस्पेक्ट भी करती हूँ। पर यहाँ इमोशनल होने से काम नहीं चलेगा।

डॉ माथुर,” ये औरत प्रेगनेंट है और हम इसे तो नहीं पर इसके होनेवाले बच्चे को तो बचा सकते है। ”

डॉ स्मिता,”मैं सही कह रही थी डॉक्टर आप काफी इमोशनल हो रहे है। तो बताइये कि कैसे करेंगे आप ये ऑपरेशन इस औरत की हालत इतनी खराब है कि इस ऑपरेशन से इसकी और इसके होनेवाले बच्चे दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है। ये ऑपरेशन रिस्की है आप मेरी बात क्यू नही समझ रहे है डॉक्टर माथुर। ”

डॉ माथुर,” पर हम कोशिश तो कर ही सकते है। अगर मुझे थोड़ा वक्त मिल जाये तो मैं कोशिश करके बच्चे को बचा सकता हूँ । ”

डॉ स्मिता, ”नहीं मैं आपसे सहमत नहीं हूँ। अगर इस औरत को या फिर इसके होनेवाले बच्चे को कुछ भी हुआ तो इसके जिम्मेदार आप होंगे डॉ माथुर सिर्फ आप। इसमें हॉस्पिटल या हॉस्पिटल का कोई भी स्टाफ जिम्मेदार नहीं होगा। ”

इतना कहकर डॉ स्मिता बाहर चली जाती है और डॉ माथुर जैसे ही पलट कर ऑपरेशन करने जाते है तो देखते है कृतिका के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही है, ये देखकर डॉ माथुर अपने आप से कहते है कि, ”अगर मुझे थोड़ा समय मिल जाता तो मैं इस बच्चे को बचा सकता था पर पता नहीं खा से ये डॉ स्मिता बीच में आ गयी। काश मैं तुम्हें बचा पाता। ये कहते कहते डॉ माथुर की आँखें नाम हो गई।

इधर डॉ स्मिता अपने केबिन की तरफ जा रही थी कि तभी वहाँ डॉ सुमित आ जाते है।

डॉ स्मिता, “डॉ सुमित उस औरत के साथ जो डॉ लोग आये थे उनकी कंडीशन कैसी है। ”

डॉ सुमित,” मैम उनमें से उस औरत के पति (वेद ) की मौत हो गयी है और उनके ड्राईवर की हालत काफी ज्यादा ख़राब है, बचने के चांस कम है। जहाँ ये हादसा हुआ था अगर वहाँ के लोग समय रहते उन्हें हॉस्पिटल ले आते तो हम उन्हें बचा सकते थे। पर होनी को कौन टाल सकता है, जो होना था वो तो हो गया। वैसे आप कितनी देर हॉस्पिटल में हैं। ”

डॉ स्मिता,” थोड़ी देर में शिफ्ट खत्म होते ही चली जाऊंगी। पर मुझे कृतिका के केस का update चाहिए। ” इतना कहकर वो अपने केबिन से चली जाती है और डॉ सुमित डॉ माथुर के पास केस का update लेने चला जाता है।

ऑपरेशन रूम में डॉ माथुर अपना सर झुकाए खड़े थे। तभी नर्स की नज़र कृतिका पर पड़ती है और वो डॉ माथुर से कहती है “सर बॉडी में हलचल हो रही है।” तब डॉ माथुर देखते है कृतिका की बॉडी रेस्पोंस क्र रही है। ये सब देखकर डॉ माथुर नर्स से कहते है कि,”जल्दी से ऑपरेशन कि तैयारी करो,हम बच्चे को बचा सकते है। इधर रूम के बाहर खड़ा डॉ सुमित डॉ माथुर की बात सुन लेता है और डॉ स्मिता को खबर देने चला जाता है।

डॉ स्मिता का केबिन सुमित,” क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ मैम ?”

स्मिता,”यस come in “

सुमित डॉ स्मिता के सामने चेयर पर बैठते हुए,” मैम वो डॉ माथुर उस औरत का ऑपरेशन कर रहे है। ”

डॉ स्मिता चौके हुए,”what “

इतना सुनते ही डॉ स्मिता जल्दी से ऑपरेशन रूम की तरफ जाने के लिए निकल पड़ती है। ऑपरेशन रूम पहुच कर डॉ स्मिता डॉ माथुर को देखती है जो गोद मे एक प्यारी से बच्ची को लेकर उनकी तरफ आते है। डॉ माथुर को अपनी तरफ आता देख डॉ स्मिता उनसे कुछ पूछने के लिए अपना मुंह खोलती है, पर डॉ माथुर उनकी तरफ बच्ची को बढ़ाते हुए नम आँखों से उन्हें देखते है।

जिसे देखकर डॉ स्मिता डॉ माथुर से कहती है,” आप रो रहे है डॉ ?”

डॉ माथुर,” हाँ एक बार आप भी इस बच्ची को गोद में लेकर देखिये। मौत के मुंह से वापस आई है। आप भी इसे गोद में लेगी तो आप भी इमोशनल हो जाएगी। लीजिये बच्ची को गोद में।

” इतना कहकर डॉ माथुर स्मिता को बच्ची थमा देते है, पर जैसे ही डॉ स्मिता बच्ची को गोद लेती है वैसे ही उन्हें बिजली का झटका लगता है और वो बेहोश हो जाती है।


अगले अंक में जारी ……


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