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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

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पहेली : भाग 7

पहेली : भाग 7

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अगले दिन सुबह जब राधा जगी तो उसे अपना कमरा अस्त व्यस्त सा दिखाई दिया । उसे आश्चर्य हुआ कि कमरा फैला पसरा सा क्यों है ? रात में तो सब कुछ ठीक था । उसने सोचा कि कहीं वह सपना तो नहीं देख रही है ? उसने एक बार फिर से चारों ओर नजर घुमाई । सामने आलमारी खुली पड़ी थी । कपड़े अस्त-व्यस्त से इधर-उधर फैले हुए थे । कुछ सामान फर्श पर बिखरा पड़ा था । उसे लगा कि कहीं रात में मां ने तो नहीं किया था यह सब ? पर मां क्यों करेगी ? सवाल वाजिब था । उसने अपनी मां की ओर देखा । वह अभी तक सो रही थी । मां के चेहरे से ऐसा लग नहीं रहा था कि उसने रात में फैला पसरी की होगी ! विनोद दूसरे कमरे में सो रहा था । फिर किसने किया यह सब ? कमरे की हालत देखकर राधा चिंतित हो गई । 

"रात में कमरे में जरूर कोई आया है" ! उसके मन में आशंका के बादल घुमड़ने लगे । उसने फुर्ती से मां को जगाया और उसे कमरे की हालत बताई । राधा की मां तारा भी कमरे की हालत देखकर चौंक गई । 

"चोर ! जरूर कोई चोर आया था रात में" ! उसने खड़े होकर आलमारी की ओर दौड़ लगाई और आलमारी खोलकर गहने , रुपये देखने लगी । दोनों ही गायब थे । 

"हाय राम ! सब गहने , रुपये ले गया हरामजादा" ! चीखते हुए राधा की मां तारा बोली । 

"हे भगवान ! ये कौन से पापों का दंड दे रहा है मेरी बेटी को ! पहले उसका पति छीन लिया और अब उसके रुपए, गहने भी छीन लिये ! क्या उसे जीने भी नहीं देगा तू" ? 

तारा का गुस्सा भगवान पर फूट पड़ा । जब परिस्थितियों पर अपना जोर नहीं चलता है तो एक असहाय औरत और कर भी क्या सकती है ? वह कभी अपने मुकद्दर को कोसती है तो कभी भगवान को । वह यह नहीं जानती कि इसमें भगवान कहां से आ गये ? जो कुछ हो रहा है वह प्रारब्ध मात्र है । लेकिन लोग अनजाने में या अज्ञानतावश उस भगवान को कोसते हैं जो सबके परम हितैषी हैं , सुहृद हैं और अपनी अहैतुकी कृपा की सब पर अनवरत बरसात करते रहते हैं । उनका कोई शत्रु नहीं है और न ही कोई मित्र हैं । वे राग द्वेष से परे हैं । लेकिन मनुष्य उन्हें फिर भी कोसता रहता है । जब माया मोह का पर्दा आंखों पर पड़ा हो तो सही ग़लत का निर्णय नहीं हो पाता है । ऐसे में भगवान पर ही सारा नजला गिरता है आदमी का । 

तारा और राधा दोनों पछाड़ खाकर रोने लगीं । उनके रोने की आवाज से दूसरे कमरे में सोया विनोद जाग गया और वह दौड़ा दौड़ा उधर आया । 

"क्या हुआ ? तुम दोनों सुबह सुबह क्यों रो रही हो ? क्या रोने से जीजाजी लौट आएंगे" ? 

विनोद को पता ही नहीं था कि घर में चोरी हो गई है । वह तो यह समझ रहा था कि सुबह सुबह किशन की याद आ गई है दोनों को । पति की मौत का सदमा इतना गहरा होता है कि उसे झेलना हर किसी के वश में नहीं होता है । राधा रोते रोते बोली 

"रात घर में कोई चोर आया था जो सब कुछ चुराकर ले गया" । 

अब जाकर विनोद को उनके रोने का कारण समझ में आया । वह आश्चर्य से बोला 

"चोर चोरी करके चला गया और तुम दोनों को पता भी नहीं चला" ? 

इस प्रश्न का उत्तर दोनों के पास नहीं था । विनोद ने बात तो सही कही थी । किशन की मौत के सदमे के बीच उन दोनों को इतनी गहरी नींद कैसे आ गई, यह सोचने वाली बात थी । 

राधा बिल्कुल कंगाल हो गई थी । न पति रहा , न जेवर और न रुपए । अब करे तो क्या करे वह ? खाये तो क्या खाये ? विपत्तियों का तिलिस्म ऐसा ही होता है । विपत्तियां अपने मकड़जाल में मनुष्य को ऐसे फंसाती हैं कि मनुष्य उससे बाहर नहीं निकल पाता है । कहते हैं कि दुख कभी अकेला नहीं आता है । अपने साथ कंगाली , अपमान और आधि - व्याधि लेकर आता है । मनुष्य की असली परीक्षा दुखों में ही होती है । कहावत है कि सोना आग में और निखरता है । उसी प्रकार मनुष्य भी दुखों में और मजबूत होता है । कुछ लोग दुखों को सहन नहीं कर पाते हैं और टूट जाते हैं , बिखर जाते हैं, बर्बाद हो जाते हैं । राधा के धैर्य की परीक्षा की घड़ी थी यह । 


विनोद फिर एक बार राधा और तारा को साथ लेकर थाने आ गया । थानेदार को रात की सारी घटना बताई और चोरी की रिपोर्ट लिखने के लिए कहा । मातादीन ने रिपोर्ट लिखने से पहले जरुरी पूछताछ की फिर रिपोर्ट भी दर्ज कर ली तथा मौका देखने खुद आ गया । 

मातादीन ने राधा के मकान का मुआयना किया लेकिन उसे चोर का कोई सुराग हाथ नहीं लगा । कहते हैं कि अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़कर अवश्य जाता है लेकिन इस चोर ने वहां पर कोई भी सुराग नहीं छोड़ा था । लगता है कि चोर आजकल बड़े होशियार हो गये हैं । वे कोई भी सुराग नहीं छोड़ते हैं । फिर पुलिस कैसे पकड़े उन चोरों को ? मातादीन ने बहुत कोशिश की कि चोर का कुछ सुराग मिल जाये लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ इसलिए वह थक हार कर वापस थाने आ गया । 

अभी वह किशन के केस के बारे में ही सोच रहा था कि सीसीटीवी कैमरों की रिपोर्ट लेकर एक पुलिस वाला उपस्थित हो गया । 

"सर ! इन फुटेज में तीन जगह किशन दिखाई दिया है" । मातादीन की उत्सुकता बढ़ गई । पुलिस वाले ने उसकी उम्मीदें बढ़ा दी थीं । वह तुरंत बोल पड़ा 

"कहां कहां" ? 

"एक तो कर्नलगंज में, दूसरे अकबरपुर में और तीसरे कानपुर सेन्ट्रल के पास" 

यह बात सुनकर मातादीन का माथा चकरा गया । वह सोच रहा था कि बिठूर और हीरामंडी के आसपास वह सीसीटीवी में कैद अवश्य हुआ होगा । लेकिन यहां तो दोनों जगहों में से एक भी जगह का नाम नहीं लिया इसने । मातादीन के अरमानों पर पानी फिरता सा नजर आ रहा था । लेकिन मातादीन इतनी आसानी से हार मानने वालों में नहीं था । वह बोला "तीनों लोकेशन मुझे दिखाओ" । 

इसके बाद एक बंदा मातादीन को सीसीटीवी फुटेज दिखाने लग गया । एक जगह उसने फुटेज को रोक लिया और मातादीन से कहने लगा 

"सर , देखिये । ये आसमानी शर्ट वाला बंदा किशन ही है" 

मातादीन कुछ याद करते हुए बोला "लेकिन उसकी बीवी ने तो बयान दिया है कि उसने नैवी ब्लू शर्ट पहनी थी उस रात" ! फिर मातादीन ने उस फुटेज को गौर से देखा और उसे डांटते हुए कहने लगा 

"तूने अकल लगाई नहीं या भगवान ने दी ही नहीं ? हर किसी को किशन बता रहा है । तुझे पुलिस में भर्ती किस बेवकूफ ने कर दिया । सुबह सुबह से मेरा माथा खराब कर दिया । चल दूसरा दिखा" ! 


वह बंदा दूसरा फुटेज दिखाने लगा । मातादीन ने उसे भी नकार दिया । अब तीसरे की बारी थी । इस बार मातादीन खुद ही फुटेज देखने लगा । फुटेज देखते देखते वह अचानक चौंक गया और उसके मुंह से निकल गया 

"ओ तेरी की ! ये यहां क्या कर रही है" ? 

दरअसल वह फोटो राधा का था । राधा से वह कई बार मिल चुका था इसलिए उसे पहचानने में वह धोखा नहीं खा सकता था । उसने उस फुटेज को कई बार देखा और उसे हर बार वह राधा ही नजर आई । 

कर्नलगंज के बाजार में राधा दिखाई दी थी मातादीन को । 10 अगस्त की रात राधा वहां क्या कर रही थी ? रात का समय था । सीसीटीवी में उस समय रात के करीब साढ़े नौ बज रहे थे । इसका मतलब था कि किशन के ड्यूटी पर जाने के बाद राधा कर्नलगंज बाजार आई थी । पर किसलिए ? इतनी रात को अकेले कैसे आई वह ? इस संबंध में राधा से पूछताछ करना आवश्यक हो गया था । 

मातादीन राधा के पास गया और उससे वही सवाल किया 

"10 अगस्त की रात तू कहां थीं" ? 

सवाल सुनकर राधा एकदम चुप हो गई । 

"बोल ! चुप क्यों हैं ? नहीं बोलेगी तो तुझे गिरफ्तार कर लेंगे" ! मातादीन उसे धमकाने लगा । 

"उस रात में घर पर ही थी साहब , कहीं नहीं गईं थी" । मातादीन की धमकी से राधा बुरी तरह डर गई थी । वह रोने लगी । 

"देख , नाटक मत कर । सच सच बता कि तू गई कहां थी उस रात ? मैं तो तुझे देखते ही समझ गया था कि तेरा कोई न कोई चक्कर जरूर चल रहा होगा ! बता , किस से मिलने गई थी तू ? क्या लगता है वह तेरा" ? 

थानेदार की बात सुनकर सबसे अधिक झटका तारा और विनोद को लगा । राधा किसी से मिलने गई थी यह खबर तो भूकंप से भी अधिक भयानक थी । राधा से ऐसी उम्मीद नहीं थी दोनों को । दोनों ने अविश्वसनीय नजरों से राधा की ओर देखा । दोनों की नजरों को ताड़कर राधा बोली 

"मेरा यकीन करो थानेदार जी , मैं घर पर ही थी । मैं रात में अकेली कहीं जाती ही नहीं हूं । आजकल जिस तरह दुष्कर्म और गैंगरेप की खबरें आ रहीं हैं उन्हें सुनकर कौन लड़की रात में बाहर निकलने का साहस करेगी" ? 

मातादीन की आंखें धोखा नहीं खा सकतीं थीं । उसने सीसीटीवी में साफ देखा था कि राधा कर्नलगंज के बाजार में जा रही है पर वह यह समझ नहीं पा रहा था कि राधा झूठ क्यों बोल रही है ? इससे उसे क्या फायदा होने वाला था ? 


शेष अगले अंक में 



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