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Vijay Yadav

Children Stories Children

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Vijay Yadav

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पैसे की अहमियत

पैसे की अहमियत

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एक समय की बात है, रामपुरा गांव में किशन नाम का एक किसान रहता था, उसके परिवार में उनकी पत्नी दो बच्चे थे, इसका नाम श्याम और मीनाक्षी था, वह परिवार खेती करके अपना गुजर-बसर कर रहा था, पति पत्नी और दोनों बच्चे बहुत ही अच्छे से रहते थे, दोनों बच्चे पढ़ाई में ध्यान लगाते थे जब उनके पास पैसे होते थे तो यह दोनों बच्चे कभी टॉफियां खरीदनी है कभी खिलौने खरीदने हैं कभी कुछ खरीदने हैं, की जिद करते थे, मजबूरी में किशन को उनकी बात माननी पड़ती थी I बच्चे अनाप-शनाप खर्चा करते थे और धीरे-धीरे वह पूरा पैसा, जो उनका जमा किया हुआ था, खत्म हो गए, कुछ समय के बाद किसान की स्थिति आर्थिक स्थिति खराब हो गई और उनके घर पैसे की दिक्कत हो गई, पैसे की दिक्कत का आलम यह था कि उनके पास खाने को पैसे नहीं थे, फिर किसान ने और अधिक मेहनत करना शुरू किया, लेकिन लॉकडाउन के कारण उनकी फसल की कीमत नहीं मिलती थी और जिसके कारण उनका परिवार बुरी तरह प्रभावित हुआ I ऐसी स्थिति आ गई थी खाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे नई कक्षा का सत्र शुरू होने वाला था लेकिन किताबें खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे I

उनकी बेटी ने मीनाक्षी ने कहा पापा मेरे लिए किताब ला दो, फिर पापा ने बड़े ही सोच के साथ कहा बिटिया मेरे पास तो अभी पैसे नहीं है, फिर मीनाक्षी बेटी इतनी होशियार थी कि उन्होंने पिताजी को एक आईडिया दिया उन्होंने कहा कि मेरे जो गुल्लक हैं, उस के पैसे से आप मेरे किताब खरीद के ला दो, यह विचार किशन को बहुत अच्छा लगा और मीनाक्षी बिटिया को धन्यवाद दिया कि बिटिया इतनी समझदार हैI उन्होंने किताब को गुल्लक के रुपयों से (लगभग दो हजार रुपयों में) ले आए और इस तरह उनकी बच्ची को किताबें मिला, किताबें को देखकर उनके पिताजी की आंखों में आंसू आ गए, कि क्या यह स्थिति हो गई ?किताब गुल्लक के पैसे से किताब खरीदना पड़ता है, लेकिन किसानों की आमदनी का कोई स्रोत नहीं, था और लॉक डाउन के कारण उनकी स्थिति अच्छी नहीं थी, तो किसान सब जानते हुए भी असमर्थ थे उनकी पत्नी राधा ने कहा कि हम अपने बच्चों को एक अच्छा संस्कार दें, यह पैसे की कीमत यह समझेंगे और जो आपने मेहनत के पैसे से जो किताब खरीद लाए हैं, उस किताब को पढ़कर यह बच्चे डॉक्टर बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे और माता जी के बातों को सुनकर आज बच्चों को भी अपनी गलती का एहसास हो रहा था I वे समझ गए थे कि जीवन में कभी भी फिजूलखर्ची नहीं करनी चाहिए,अपने माता-पिता की स्थिति को देखकर उनके मन में एहसास हो गया था कि उन्होंने गलती की, जिसका खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है वे शर्मिंदा थेI 

उनके पुत्र ने कहा माताजी ‘आप चिंता मत करो ‘ मैं पढ़ लिखकर एक अच्छा इंसान बनूंगा और और जितना संभव हो, शारीरिक रूप एवं मानसिक रूप से भी मेहनत करूंगा, और मैं चाहूंगा कि आपके जीवन में पैसों की कभी दिक्कत ना हो, आप लोग हमेशा खुश रहें, हम बेटा होने का फर्ज अदा करेंगे और कभी भी आपकी आंखों में आंसू नहीं आने देंगे , आप मत रो Iऔर इस दिन से दोनों बच्चों ने दोनों बच्चों ने संकल्प लिया कि अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करेंगे दोनों बच्चे ने उसके बाद से बहुत अच्छे से पढ़ाई करना शुरू कर दिया और फिर पढ़ लिखकर बड़े होकर एक डॉक्टर दूसरा बना, दूसरा इंजीनियर बना I

 

       


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