इज्ज़त
इज्ज़त
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इज्ज़त सबकी होती है फिर चाहे वो अमीर हो या ग़रीब। इज्ज़त सबकी बराबर होती है। फिर क्यूँ अपने से नीचे तबके के लोगों को इतनी हिकारत भरी नज़रों से देखते हैं। जैसे उनके जिस्मों मे कीचड़ लगा हो। जब की ख़ुदा ने दोनों को एक ही मिट्टी से बनाया है।
