nisha gautam

Others


4.0  

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एक शाम...

एक शाम...

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"मेरा टिफिन कहां है?"

"अभी लाती हूं।"

नैना अभय को एक हाथ से टिफिन और दूसरे से रुमाल और घड़ी देती है।

"अरे! मैं फिर इन्हें भूल गया था। पता नहीं तुम न होती तो मेरा क्या होता" अभय कहता है।

"मैं न होती तो अनन्या होती।" नैना मज़ाक में कहती है।

ये कहने पर अभय उसे एकटक देखता है और फिर दोनों हँस देते हैं।

"अच्छा मैं चलता हूं, शाम को मिलते है, तैयार रहना और स्कूल अच्छे से जाना।"

नैना अभय को दरवाज़े की तरफ छोड़ते हुए कहती है- "हां, और तुम भी ऑफ़िस सही से जाना।"दोनों के दिन की शुरुआत हमेशा इसी तरह होती है।

अभय एक इंजिनियर है, और नैना एक सांवली सी प्यारी सी लड़की है। अभय और नैना दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे, बाद में दोनों की पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों की शादी हो गई। हालांकि उनकी शादी लव मैरिज नहीं थी क्योंकि अभय किसी और को पसंद करता था। उसका नाम अनन्या था जो कि बहुत ही सुंदर थी। अनन्या भी अभय को पसंद करती थी, लेकिन उसकी शादी किसी बिज़नेस मैन से हो गई थी।

बाद में अभय भी उस 16 साल के प्यार को 16 दिन का समझकर आगे बढ़ जाता है।

अभय के ट्रांसफर के बाद नैना और अभय दूसरे शहर आ जाते है। अभय के ऑफ़िस जाने के बाद नैना अकेले बोर होने के कारण एक स्कूल में पढ़ाने लगी थी।

वैसे अभय और नैना दोस्त बनकर रह रहे थे, लेकिन इतने दिन साथ रहने से दोनों एक दूसरे के लिए कुछ महसूस करने लगे थे। अभय को नैना की सादगी भाने लगी और नैना अभय को समझने लगी।

आज शाम अभय के प्रोमोशन की खुशी में दोनों डिनर के लिए बाहर जाने वाले है।

तो नैना स्कूल से आती है और तैयार होने लगती है। वो अभय के पसंद की साड़ी पहनती है और बिंदी काजल लगा कर सादगी से तैयार होती है। शाम को अभय घर आता है और नैना को देख कर उसमे है खो जाता है। नैना के पूछने पर कि वो कैसी लग रही है, तब वो होश में आता है और कहता है- "अच्छी लग रही हो।" नैना मुस्कुराती है और कहती है- "अच्छा जाओ, तुम भी तैयार हो आओ जल्दी से।" अभय तैयार होकर आता है और दोनों बाहर चले जाते हैं। दोनों एक रेस्तरां पहुंचते है। अभय नैना से पूछ कर खाना ऑर्डर करता है। दोनों डिनर करके जा रहे होते है कि अभय किसी लड़की से टकरा जाता है और उसकी मदद करते हुए उससे सॉरी बोलता है। वो लड़की उठती है तो अभय उसे देखता ही रह जाता है, क्योंकि वो लड़की अनन्या होती है। अभय को अनन्या को देखता देख नैना कुछ अलग महसूस करती है, लेकिन हिम्मत करके उन दोनों के पास जाती है और थोड़ा आश्चर्य से कहती है- "हाय अनन्या! कैसी हो और यहां कैसे ? अनन्या कहती है-"हाय नैना! मैं अच्छी हूं । मैं अपने हसबैंड के साथ डिनर के लिए आयी हूं। लेकिन तुम दोनों साथ में?" नैना चाहती है इस सवाल का जवाब अभय दे, लेकिन वो कुछ नहीं कहता तो नैना हार कर बताती है-"मैं भी अपने पति के साथ डिनर करने आई थी" अभय अभी भी चुप है, और अनन्या को देखता रहता है। नैना ये देखकर रुआंसी हो जाती है। लेकिन अनन्या के अभय से पूछने पर "और तुम यहां कैसे?" तब वो नैना को देखता है। वो नैना के चेहरे का भाव समझ जाता है और कहता है-"मैं ही नैना का पति हूं।" ये सुनकर नैना थोड़ा संभलती है और अनन्या हँसते हुए कहती है-"ओह! तुम दोनों ने शादी कर ली। दैट्स ग्रेट! लेकिन अभय तुम को कोई अच्छी लड़की मिल सकती थी।" ये सुनकर अभय नैना का हाथ पकड़ कर कहता है-"अच्छी मिल सकती थी, लेकिन नैना ना मिलती और नैना के अलावा मुझे और कोई नहीं चाहिए।" ये सुन कर नैना अभय को ही देखती रहती है। फिर अनन्या कहती है- "अच्छा है। लेकिन अब मुझे चलना चाहिए। मेरे हसबैंड वेट कर रहे होंगे।" वो बाय कह कर चली जाती है।


नैनो और अभय घर जाने के लिए कार की ओर बढ़ते हैं। कार में नैना चुपचाप बैठी होती है और जो हुआ उसके बारे में सोच रही होती है। मैं उसे देख कर समझ जाता है कि वह क्यों शांत है। उसका ध्यान हटाने के लिए अभय बात करने की कोशिश करता है, लेकिन नैना रुआंसी होती है, इसलिए वह ना तो अभय की ओर देखती है और ना बातों का जवाब देती है और मोबाइल में कुछ करने लगती है। घर पहुंचते ही नैना जल्दी से कार से बाहर आती है और वाशरूम में जाकर शीशे के सामने रोने लगती है। लेकिन किसी तरह अपने आँसू पोंछ कर बाहर आती है तो अभय उससे बात करने की कोशिश करता है। लेकिन नैना नींद का बहाना बना कर लेट जाती है और अभय भी अपना ऑफ़िस का काम करने के बाद सो जाता है। लेकिन नैना पूरी रात नहीं सोती। वह सुबह उठती है तो देखती अभय घर पर नहीं है और बेड के पास एक नोट मिलता है जो अभय ने रखा होता है। उसमे लिखा होता है-"मुझे पता है तुम रात भर नहीं सोए इसलिए नहीं जगाया, और आज स्कूल से छुट्टी ले लो, ब्रेकफ़ास्ट मैंने कर लिया है और तुम्हारे लिए फ्रिज में रख दिया है। तुम ऐसे तो मेरी बात ना सुनती इसलिए यह लिखना पड़ा, सुनो कल जो भी हुआ उसके लिए सॉरी। जानता हूं मेरा सॉरी ऐसे नहीं मानोगी इसलिए आज शाम तैयार रहना, आइसक्रीम खाने चलेंगे।" लेटर पढ़कर नैना की आँखों में आँसू आ जाते हैं और वह मुस्कुराती है लेकिन उसके मन में पिछली रात शाम की बातें घूम रही होती हैं। शाम होने पर बात तैयार होने लगती है। अभय घर आता है और उसके हाथ में गुलाब होते हैं। वो डोरबेल बजाता है तो नैना दरवाज़ा खोलती है। अभय नैना को देखकर कुछ उदास हो जाता है, क्योंकि वो बिल्कुल वैसे तैयार होती है जैसा पिछली शाम उसने अनन्या को देखा था। हेवी मेकअप, हेवी साड़ी, भरी भरी चूड़ियां डार्क लिपस्टिक। अभय गुलाब वही पर रख देता है और नैना को कमरे में ले जाता है। वो नैना को अलमारी से दूसरी साड़ी निकाल कर देता है और बदल आने को कहता है। नैना कुछ समझ नहीं पाती। नैना साड़ी बदल कर आती है तो अभय उसे शीशे के सामने बैठाता है और उसका मेकअप पोछता है। नैना पूछती है-"अभय ये क्या कर रहे हो?" अभय उसके होठों पर उंगली रखकर चुप रहने को कहता है। अभय उसकी चूड़ियां कम करता है, बड़ी बिंदी हटाकर छोटी बिंदी लगाता है, हल्के रंग की लिपस्टिक लगाता है और आखिरी में काजल लगाकर कहता है-"परफेक्ट! अब लग रही हो न वो नैना, जो मुझे पसंद है।"ये सुनकर नैना शर्मा जाती है। अभय नैना का हाथ पकड़कर बाहर लाता है और वहां रखे गुलाब लेकर घुटनों पर बैठ जाता है। नैना की ओर गुलाब बढ़ाते हुए अभय कहता है-"मुझे पता है नैना कल जो हुआ उससे तुम अपसेट हो, लेकिन मेरा यकीन मानो अनन्या के लिए मेरे मन में अब कुछ भी नहीं है। वो तो बस इतने सालो बाद अचानक से सामने आई तो मुझे कुछ सुझा नहीं। प्लीज मुझे माफ़ कर दो। मुझे तो तुम पसंद हो और जैसी हो वैसे न की किसी की कॉपी। प्लीज़ जैसी हो वैसी रहो।"

नैना ये सब सुनकर भावुक हो जाती है और अभय के बराबर बैठ कर बस उसे ही देखती रहती है। अभय कहता है-"मैं बहुत दिनों से कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पाया ये सोचकर कि पता नहीं तुम्हारे मन में क्या हो और अगर कह दिया तो हमारी दोस्ती पर कोई प्रभाव ना पड़े। लेकिन कल जो हुआ उससे मुझे पता चल गया कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो; इसलिए अब मैं कहता हूं- आई लव यू नैना।"

अभय के इतना बोलने पर नैना अभय के गले लग जाती है और रोने लगती है। अभय थोड़ा मज़ाक में कहता है-"अरे! आई लव यू नहीं बोलना तो ना बोलो लेकिन ऐसे रोओ तो नहीं।" नैना हँसने लगती है और कहती है-"मैं भी तुमसे प्यार करती हूं।"

 


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