छोटू की जादुई गुफा और सुनहरी साँस
छोटू की जादुई गुफा और सुनहरी साँस
एक था बच्चा, नाम था छोटू,
थोड़ा सा दुबला, थोड़ा सा मोटू।
पर उसके दिमाग में थी एक गहरी गुफा,
जहाँ रोज़ होता था एक नया-नया मसला!
इस गुफा में रहते थे दो अजीब पहरेदार,
एक था गुस्सैल, एक समझदार।
झटपट था पहला, जो लाल-लाल दिखता,
गुस्से के ढोल पर, जो हमेशा था लिखता।
कानों से धुआँ और नाक पर गुस्सा,
बात-बात पर हो जाता वो कट्टी और रुस्सा!
दूसरा था सागर, नीला और शांत,
जैसे कोई ऋषि, या कोई वेदांत।
उसकी आँखों में था किताबों का ज्ञान,
और हर मुश्किल का हल था उसके पास विद्यमान।
एक दिन की बात है, स्कूल में होने वाला था बड़ा धमाल,
जंगल किंग बनने का हुआ था बड़ा एलान।
छोटू ने टाइगर बनने की थी कसम खायी,
एक महीने से उसने खूब दहाड़ मचायी।
"मैं टाइगर बनूँगा!" वो सबसे कहता,
उसी के ख्वाब में वो दिन-रात रहता।
फिर माँ गयी बाज़ार, कॉस्ट्यूम लाने टाइगर की यार,
और अपना छोटू कर रहा था उसका बेसब्री से इंतज़ार।
पर जब खुला बैग, तो उड़े सबके होश,
टाइगर की जगह, शेर का कॉस्ट्यूम पड़ा था खामोश!
माँ से हुई गलती, क्योंकि भीड़ थी बड़ी भारी,
गलत कॉस्ट्यूम ने बिगाड़ दी छोटू की सारी तैयारी।
गुफा में अब शुरू हुई हलचल— धुम-धुम-धुम,
झटपट ने ढोल बजाया, मच गयी धूम!
"छोटू!" झटपट चिल्लाया, "देखो ये धोखा,
माँ ने छीन लिया टाइगर बनने का मौका!
अभी कॉस्ट्यूम फेंको, और लगो रोने ज़ोर-ज़ोर से,
और करो शुरू तोड़-फोड़ पूरे घर में शोर से!"
छोटू का चेहरा हुआ टमाटर जैसा लाल,
मन में उठा एक गुस्से का उबाल।
हाथ उठा कॉस्ट्यूम को फाड़ने के लिए,
माँ को बुरी बातें सुनाने के लिए।
तभी... एक सुनहरी रोशनी गुफा में छायी,
सागर ने अपनी छोटी सी घंटी बजायी टिंग! सागर मुस्कुराया और बोला बड़े प्यार से,
"छोटू, क्यों हार मान रहे हो इतनी सी बात से?
क्या भूल गए तुम अपनी Superpower का राज़?
झटपट के शोर में, खो गयी है तुम्हारी आवाज़।"
छोटू भुनभुनाया, "कौन सी सुपरपावर यार?
देखो ना माँ तो टाइगर की जगह, लायन कॉस्ट्यूम की आफ़त है लायी!"
सागर बोला, "तुम्हारी सुपरपावर है सुनहरी साँस,
जो झटपट के ढोल को कर देती है शांत।
चलो मेरे साथ, एक लंबी साँस भरो,
गुस्से के भूत से अब तुम ना डरो।"
छोटू ने हिचकिचाते हुए नाक से हवा खींची
स्स्स्स्स्स्शशशश.... और धीरे से उसे होंठों से फूँका
फूऊऊऊऊ.... एक बार... दो बार... और फिर तीसरी बार,
गुफा में फैला ठंडक का बाज़ार।
झटपट का ढोल अब धीमा हो गया,
गुस्से का राक्षस थक कर सो गया।
सागर ने समझाया, "ओ मेरे प्यारे सुल्तान,
टाइगर हो या लायन, दोनों हैं जंगल की शान!
टाइगर के पास खूबसूरती है, शेर के पास हैं बाल,
दोनों की दहाड़ सुनकर, काँपते हैं अच्छे-अच्छों के हाल।
अगर तुम आज रोओगे, तो माँ को कर दोगे दुखी,
क्या शेर बनकर तुम नहीं रह सकते सुखी?"
छोटू को अब बात समझ में आयी,
उसने गुस्से की दुश्मनी, शांति से निभायी।
माँ को गले लगाया, ग़म को भुलाया,
"कोई बात नहीं माँ, मैं लायन बनकर दिखाऊँगा नया जलवा!"
फिर बारी थी स्टेज पे जाने की,
स्टेज पर जब लायन बनकर छोटू ने ली एंट्री,
हॉल में बज उठी तालियों की पेंट्री!
उसने ऐसी दहाड़ मारी, ऐसी दहशत मचायी,
कि 'Best Performer' की ट्रॉफी उसने ही पायी।
गुफा में अब दोनों राक्षस शांत थे,
झटपट सो रहा था, और सागर मुस्कुरा रहा था।
छोटू जान चुका था ज़िंदगी का ये सार,
शांत रहना ही है सबसे बड़ा हथियार।
गुस्सा तो आएगा, ये दिमाग का एक खेल है,
पर 'सुनहरी साँस' ही हर मुश्किल की रेल है।
अब झटपट ढोल बजाये या मचाये खटपट,
छोटू अपनी साँस से उसे शांत करता है झटपट!
तो आया बच्चों समझ? यही करना है तुमको भी अब,
जब झटपट लाल राक्षस मचाए दिमाग में गजब!
चिल्लाना या रोना नहीं है समस्या का समाधान,
बस एक लंबी सुनहरी साँस में छुपा है सारा ज्ञान।
तो जब भी गुस्सा आए, मत हो तुम कभी परेशान,
अपनी साँस की सुपरपावर से करो लाल राक्षस का कन्यादान! अब चलो, मेरे साथ एक लंबी साँस लो...
स्स्स्स्स्स्शशशश.... और प्यार से मुस्कुराओ!
क्योंकि याद रखना बच्चों, शांत दिमाग और गहरी साँस में ही छिपा है ज़िंदगी का असली ज्ञान!
