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Jaanvee Pawarr

Others

4.5  

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चार दीवारें

चार दीवारें

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दुनिया है बहुत बड़ी, पर मेरी तो बस यही चार दीवारें

यहीं है मेरी धूप-छाँव, यहीं है सावन की बहारें

इन्हीं में तो संजोये कई सपने

इन्हीं में तो रहते हैं मेरे अपने

इन दीवारों ने मेरे हर पल को जिया है

मेरी हँसी भी सुनी है, मेरे आँसुओं को भी पिया है

बेजान ही सही पर जान बसती है इनमें मेरी

दीवारें नहीं हैं यह, है पहचान मेरी

मुझसे कभी किसी बात पर रूठती नहीं

मैं टूट जाती हूँ पर यह टूटती नहीं

कहने को तो ईंट-मिट्टी से बनी है यह दीवार

पर दुनिया में सबसे ज़्यादा इन्हीं में बसा है प्यार

न शिकवा न शिकायत, बस आपका घर बनाती हैं

यह दीवारें ही तो हैं जो घरों को सजाती हैं

मेरा सबसे ज़्यादा वक़्त इन्हीं के साथ होता है

यह तब भी जगी होती हैं जब पूरा घर सोता है

इन दीवारों का शुक्रिया, इन्होंने घर को घर बनाया

इनका साथ पाया जब भी खुद को अकेला पाया

इन दीवारों ने कभी सवाल नहीं किए,

न कभी कोई शिकायत सुनाई।

बस चुपचाप हर मोड़ पर

अपनी बाँहें फैलाकर मुझे पनाह दिलाई।

कल शायद मैं कहीं और चला जाऊँ,

ये दीवारें यहीं रह जाएँगी।

मगर मेरी हँसी, मेरे आँसू, मेरी दुआएँ,

इनकी साँसों में हमेशा बस जाएँगी।

हर दीवार में गुज़रा पल रहता है

इन दीवारों को महसूस करो

क्योंकि... हर घर कुछ कहता है


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