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Parul Sharma

Children Stories Inspirational

4  

Parul Sharma

Children Stories Inspirational

बिस्कुट का पैकेट

बिस्कुट का पैकेट

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रेखा रोज की तरह कंधे पर बस्ता लिए विद्यालय की ओर भागी जा रही थीI वह आज फिर विद्यालय देर से नहीं पहुचना चाहती थीI वह घर से सही समय पर निकलने के बाद भी विद्यालय देर से पहुचती, कभी उसे कोई बिचारा जानवर मिल जाता जिसे मदद की जरुरत होती, तो कभी अपने गाँव के ही कोई काका या काकी मिल जाते और उसे मदद के लिए पुकार लेतेI सब जानते थे की रेखा बहुत ही स्नेहिल स्वभाव की व सबकी मदद करने वाली बच्ची थीI पर लगातार देर से पहुचने के कारण मास्टरजी उससे नाराज रहते थेI इसलिए उसने आज सुबह ही सोच लिया था कि वह कही नहीं रुकेगी और विद्यालय समय पर पहुचेगीI तभी उसकी नज़र पेड़ के नीचे बैठे एक बूढ़े व्यक्ति पर पड़ीI वह हाथ फैला के आने – जाने वालो से कुछ खाने के लिए मांग रहा थाI रेखा थोड़ी सी ठिठकी पर देरी के डर से रुकी नहींI 

अब रेखा विद्यालय तो समय पर पहुँच गई थी लेकिन रह-रह कर उस बूढ़े आदमी का चेहरा उसे याद आ रहा थाI वह सोच रही थी कि काश वह रुक कर उसके लिए कुछ खाने को ले आतीI मध्याह्न भोजन के समय भी रेखा उसी के बारे में सोचती रहीI भोजन के उपरांत रेखा ने देखा कि सभी बच्चे बड़े खुश थेI उसकी भी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उसने देखा की मास्टर जी सभी बच्चों को एक-एक बिस्किट का पैकेट बाँट रहे थेI सभी ने जल्दी – जल्दी अपने पैकेट खोले और खाने लगेI लेकिन रेखा अपना बिस्किट का पैकेट हाथ में लेकर मुस्कुरा रही थीI अब उसे केवल छुट्टी का इंतजार था ।



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