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उत्कट चाह आम इंसान शैलेन्द्र गौड़ प्रबल चाह इंसानियत की चाह असंतुष्टि के तूफ़ान शांति-चैन अविरल सतत् प्रवाह चाह में चाहत परिश्रम और पैसा घेर लेते सरित सम मुक्तक इंसान ए आम हूँ बहु रोग खुश रहने की चाह आणिनितीमत्ताजिवनाचेहेत्रीसुत्रअंगिकारूनचालतराहणे.हाचजीवनप्रवासहोय.🌸अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि🌸भंडारा निज जीवन सहायक प्रभाव कुछ भी न चाह

Hindi चाह Quotes