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वो मुझमें...

वो मुझमें है समाया , जग जिसे भगवान कहता है । वो मेरा है हमसाया, जिसका सब गुणगान रहता है। बिना इच्छा से जिसकी, कण भी कोई हिल नहीं सकता , वही मुझको है भाया , मेरे मन उसका ही बस भान बहता है ।।।। _ घनश्याम शर्मा

By Ghanshyam Sharma
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