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सूरज मुझमें...

सूरज मुझमें डूबा है तो ... मुझसे ही निकलेगा भी । उम्मीदों को पंख लगेंगे ... मौन व्यथा ये बोलेगी । नैया पार लगेगी निश्चित ... इतना भी है मुझे पता , द्वार सफलता के अब सारे ... करुण-कथा ही खोलेगी। __घनश्याम शर्मा

By Ghanshyam Sharma
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