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तेरी नज़रों...

“ तेरी नज़रों में क्या कीमत मेरी, तुझसे मेरा राब्ता है क्या कितना समझेगा मुझे, देख के सुराख से, तु सोच नाॅ, तेरे सोचने से क्या... ”

By Arun kumar Singh
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