STORYMIRROR

सुलगती नदी...

सुलगती नदी थी वो शीतल सा आग था वो तपती रेत को फिर से मुट्ठी मे भर कर उड़ा दिया आँशुओं की ओस में भींगी थी दिल की जमीं यादों के झोंके ने फिर से रूह के चादर उठा दिये --कंचन प्रभा

By Kanchan Prabha
 336


More hindi quote from Kanchan Prabha
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments