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शहरों को...

“ शहरों को डूबते देखा है, बूढ़े बाप को अपने बेटे के , अर्थी का सहारा देते देखा है । उसकी मां को अपनी आंसू छुपा कर, अपनी बहू की आंसू पोछते देखा है । हा जनाब,मैंने यहां नेताओं को , जानवरों का चारा खाते देखा है।। ”

By Abhimanyu Kumar
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