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रेत सम हाथों से...
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रेत सम...
“
रेत सम हाथों से फिसल रहे हो तुम ...आहिस्ता -आहिस्ता, कि बढ़ रहा दिल का चांद अमा की ओर आहिस्ता-आहिस्ता।
”
By
Anamika Mishra
217
दिल
चांद
अमावस्या
रेत
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Anamika Mishra
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