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न बुरा न...

न बुरा न अच्छा न कम न ज्यादा न तेरा न मेरा सबका होक भी किसी का नहीं इसे ही"वक़्त "कहते है - संध्या सोलंकी (" दिल थी ")

By Solanki Sandhya
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