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मुस्कुराना...

मुस्कुराना तो आदत है मेरी, किसी के दिल को चुराने की साज़िश नहीं। नग़्मे मोहब्बत के लिखती हूँ अक़्सर, आशिक़-मिज़ाज हूँ आशिक़ नहीं।

By Sapna Shabnam
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