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दिल-ए-ख्वाहि...

दिल-ए-ख्वाहिश है कि तुम्हें ये पैग़ाम लिख दूँ, तुम्हारी यादों में ऐ सनम मचलती शाम लिख दूँ। सिलसिला ख़ामोशी का बहुत हुआ अब, इजाज़त हो तो इक चिट्ठी तेरे नाम लिख दूँ!

By Sapna Shabnam
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