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मंतव्य...
“
मंतव्य सिद्ध होते जाएं तो अभिमान का आना एक सहज प्रवृत्ति है। अच्छे मंतव्य और अंतिम गंतव्य का ज्ञान, हमें अभिमान तज देने में सहायक होता है। हमारा जीवन विफल नहीं सफल है यदि हम अभिमान में निश्चेत नहीं अपितु न्यायप्रियता से जी रहे हैं rcmj
”
By
Rajesh Chandrani Madanlal Jain
342
मंतव्य
गंतव्य
अभिमान
निश्चेत
न्यायप्रियता
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hindi quote
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Rajesh Chandrani Madanlal Jain
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