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महदूद नहीं...

महदूद नहीं है उस खुदा की नवाजिश क्या हुआ जो कि बेहिसाब है तीरगी ए शब उसकी अजमत़ हो तो सहर भी दूर नहीं फिरोज़ा कर ही देगी हर शय को हर जर्रे को

By Pooja Agrawal
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