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जो खौफ मन...

जो खौफ मन में कहीं था दबा सा वह निकल के विकराल रूप धारण कर आया है वह मन का भाव जिसको तू खुद समझ नहीं पाया है जितना डरेगा उतना डराएगा वह मिथ्या है, वह मृगतृष्णा है, तेरी ही रची माया है

By Pooja Agrawal
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