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कुछ मुझमें कमी...
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कुछ मुझमें...
“
कुछ मुझमें कमी थी आंखों में नमी थी वो रात ना ढली थी तुमने हाथ छोड़ा और फिर कभी हमारी बात ना बनी थी
”
By
Satish Kumar Sah
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