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ख्वाहिशों...

ख्वाहिशों भरे बस्ते को जब कंधों से उतारा, नदी किनारे बैठ सूरज की परछाई को तब घंटो तलक निहारा, हल्का लगा जीवन यह, जब ख़ुद को इस अन्तर्द्वन्द से उभारा| लेखक :नितिन शर्मा

By Nitin Sharma
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