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इस जगत से...
“
इस जगत से जब हमें अधिक कुछ चाहिए नहीं होता है जब मिले हुए को भी जगत को लौटाने के भाव होते हैं तब हम कभी भी कहीं भी सुखी एवं आनंद में रहते हुए कम प्रयासों में भी अपना अस्तित्व बनाए रख सकते हैं
”
By
Rajesh Chandrani Madanlal Jain
247
जिवनजगताना
अपनेविनम्रस्वभावसेबनोव्यवहारकुशलअच्छीजिंदगीजीनेकीहैयेनयीपहल
सुखी
आनंद
अस्तित्व
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Rajesh Chandrani Madanlal Jain
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