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गुण, अवगुण...
“
गुण, अवगुण चीन्हई नहीं कोई। कान भरहिं सोई मीठा होहिं।
”
By
S R Daemrot (उल्लास भरतपुरी)
414
वांग्य बाण
चुगलखोर
चमचागिरी
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S R Daemrot (उल्लास भरतपुरी)
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