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चल पड़े जो...

चल पड़े जो रास्तों पर तो रुकना नहीं रुकावटें हज़ार आए पर कभी झुकना नहीं पत्थर से पत्थर टकराती है तो हीं चिंगारी निकलती है बार-बार ठोकर खाकर हीं तो मंज़िल मिलती है | # विवेक रौशन

By VIVEK ROUSHAN
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