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छोड़ना ही...

छोड़ना ही बेहतर समझा उसे जो घर छोड़ मकान में मेरे साथ जीवन बसर करना चाहती थी। खुश हूँ,मैं आज भी माँ-बाप के साथ घर में रहता हूँ। -- सुनील पुरोहित --

By Sunil Kumar Purohit
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