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आकर मेरी...

आकर मेरी बाहों में वो खोने लगे हैं। शायद वो आज मीत मेरे होने लगे हैं।। कल तक आँसू बहाते थे हम उनके लिए- आज वो पनाह में आकर रोने लगे हैं ।।

By Shraddhanjali Shukla
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