चारों तरफ है, और फिर तृप्ति भी तो है- कि कोई तो है पास। यह ‘कोई’ कोई नहीं सिर्फ मेरी चारों तरफ है, और फिर तृप्ति भी तो है- कि कोई तो है पास। यह ‘कोई’ कोई नहीं सि...