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Kresha Parekh

Others

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Kresha Parekh

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ज़िन्दगी, तू तो बस दौड़ती गयी

ज़िन्दगी, तू तो बस दौड़ती गयी

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ए ज़िन्दगी जबसे है तूने इस दुनिया में लाया

तबसे है तूने खेल खिलाया

बचपन के उन गलियों की लुक्का छुप्पी


समंदर के उस पानी के साथ पकड़ा पकड़ी

आसमान में उस चमकते तारों की गिनती

या उस चाँद के साथ दौड़ने की ख़ुशी


सूरज की किरणों से आँख मिलाना

उस बचपन के पहले प्यार को देखकर

नज़र चुराना

दोस्तों के साथ दिन भर भटकना


फिर घर आकर माँ बाप की पुकार सुनना

ज़िन्दगी, तू तो बस दौड़ती गयी

थोड़ी थम जा, पीछे छूटे अपने उन लोगों को

मैं एक याद देकर आयी ।


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