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Shrabanti Rana

Others

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Shrabanti Rana

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यादे मासूमियत के

यादे मासूमियत के

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अपने अक्स को देख आँखें भी पूछती है

कहाँ छोड़ आए हम अपने मासूमियत के निशां ।

जहां में छाई है फुर्सत ही फुर्सत

अब याद आती है हमे यारों का कारवां। 

याद भले ही पुरानी हो गयी है यारी की

पर याद करते ही अब भी चहक जाता है समां ।

गुफतगु मे खो जाती थी हमारी सारी रंजिशें

मुद्दतों बात दिल कर रहीं है ये ही फरमाइशें।

जो सख्शियत खो गइ उस बचपन में

फिर बैठे ढूंढते हैं हम पुराने तस्वीरों में।


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