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Nirmal Gupta

Others

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Nirmal Gupta

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उसे पता है

उसे पता है

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आख़िरकार उसे मिल गया

ईंटों के चट्टे के बगल में

एक ठंडी छाया का रहम

दिल टुकड़ा

अब वह इत्मीनान से बैठ

कपड़े में बंधी रोटियाँ निकालेगी

खोलेगी भूख का जादुई पोटली


वह अरसे से भूखी है

मग्न हो कर हर कौर को चबायेगी

साथ ही साथ डालती जायेगी

रोटी के सख़्त किनारे

कौओं की ओर

उसे अच्छी तरह मालूम है

कि खाली पेट किस कदर दुखता है


रोटी खाने के बाद

वह जायेगी हैंडपंप के पास

ठंडे पानी की तलाश में

अंजुरी भर भर पानी पिएगी

और लौटेगी वहां से दोनों

हथेलियों में

बड़े जतन से पानी लिए


वह डाल देगी उसे

ईंटों के चट्टे के पास लगे

तेज धूप से मुरझाये

पौधे की जड़ में

और फिर पोंछेगी पत्तियों को

अपने गीले हाथों से हौले हौले


पेट भर जाने के बाद भी

उसे याद है सभी की भूख प्यास

भरपेट अघाये हुए लोगों की तरह उसे

किसी को भूल जाना नहीं आता ...


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