उजली धूप
उजली धूप
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आज बैठे है अपने घर की छत पर
सुरज बिखेर रहा है अपनी उजली धूप
दौड़ती भागती सी जिंदगी में ,
उलझनों के तरकश में दे रही है आवाज़,
रुक जा ज़रा थाम ले ज़रा इन लम्हों को,
चिड़िया की खनकती खनकती
आवाज़ लिए आई है उजली धूप।
तितली के रंगों को, फूलों की महक को जीवन दे
जाती है ये उजली धूप ।
रात के काले रंग को रंग जाती है ये उजली धूप ।
नए दिन मे नई रोशनी लिए आई है उजली धूप ।
