तेरा शहर
तेरा शहर
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मेरे दोस्त बहुत सकूँ है तेरे शहर की हवा में।
सुना है यहां कोई भी मोहब्बत नहीं करता ॥
तेरे गली में सभी बच्चे बड़ी तहजीब वाले है ।
क्या कहा गलियों में कोई शरारत नहीं करता॥
मरासिम नहीं रहा कोई पुराने जमाने जैसा।
क्या बात है कोई भी शिकायत नहीं करता ॥
खलूस -०-रसूक है हर एक शख्सियत में ।
देखता हूं गोर से कोई इबादत नहीं करता॥
कर रहा है हर कोई करम अपना अपना।
मसरूफ है कोई भी रिवायत नहीं करता॥
मेरे दोस्त बहुत सकूँ है तेरे शहर की हवा में।
सुना है यहां कोई भी मोहब्बत नहीं करता ॥
