स्वागत बसन्त
स्वागत बसन्त
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तुम आओ ओर खुशीयाँ न लाओ
ऐसा भला हुआ है कभी
तुम आओ ओर बाग न महके
ऐसा भला हुआ है कभी
तुम आओ ओर पंछी न चहके
ऐसा भला हुआ है कभी
सरसों भी खिल उठी खेतों में
बौरें भी झूल उठी आमों में
प्रकृति दिखा रही अपना दिवानापन
हर ओर सुगंध बिखेर रही ये मदमस्त पवन
कि हो चला बसन्त का आगमन
तुम आये सुनहरी धूप संग लाये
खिल उठे घर आंगन
स्वागत बसन्त स्वागत बसन्त।
