STORYMIRROR

Vikram mahapatra

Others

1  

Vikram mahapatra

Others

शरण

शरण

1 min
59

मैं आज फिर कहीं खो गया,


उसको फिर लिखते लिखते


मेरा सब्र भी कहीं खो गया


ये सब्र सीखते सीखते।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Vikram mahapatra

शरण

शरण

1 min पढ़ें

शरण

शरण

1 min पढ़ें