रोको मत टोको मत,...
रोको मत टोको मत,...
रोको मत टोको मत, आगे बढने दो ना
आसमान की ताजी हवा मे थोड़ा उड़ने दो ना...
भूल क्या है जो लड़की हूँ, मैं तो मेरे मन मे भी बड़ा समंदर हूँ,
रोको मत टोको मत .... उस समंदर में गोते लगाने दो ना
मेरे सपने बस सपने न रह जाए
उसेे खुली आँखो से पूरे करने दो ना
के हिसाब किताब कुछ नहीं जानती तुम्हारी ये गुड़िया,
समाज के ताने नहीं मानती
तुम्हारी ये गुड़िया.......
तुम्हारी गुड़िया सांस लेना चाहती है।
अपने अरमानो का आसमा पूरा करना चाहती है
खुशीयों कि बारिश मे भीगना चाहती है
रोको मत टोको मत
ज़मीन् पर पाव रखने दो ना
आसमान के तारो कि तरह चमकने दो ना .............
के सहारे कि बात नही करती तुम्हारी ये गुड़िया,
बस किसी का सहारा ना लेना पड़े
इसलिए खुद को आत्मनिर्भर करने की चाह रखती हैं तुम्हारी ये गुड़िया,,
हां, गलती करने पर रोकना टोकना पर सही इरादों को पंख लगने दो ना
के चार दीवारी का जीवन तो जी लेगी
तुम्हारी ये गुड़िया पर ये सोच जो तरक्की मांगती है आगे बढ़ने कि ज़िद करना जानती है
वो पिंजरों से बाहर निकलने कि कोशिश करेगी ।
आसमान मे उड़ने कि बात कहेगी।
मन कि बात मन मे ना रह जाए ।
इसलिए अपनो ख्वाबों को पूरा करने कि रास्ते बुनेगी।
रोको मत टोको मत अपने फैसलो को अपनी गुडिया पर प्यार से थोपो मत संस्कार के नाम पर पुरानी सोच को थोपो मत,
मुझे दिल से कुछ करने दो मेरी मरज़ी भी है जरुरी ।
इस एह्सास को रहने दो न।
पिंजरे कि बात नहीं करती मेरी सोच
इस बे - बुनियाद समाज कि सोच से नहीं डरती आपकी गुड़िया,
मुझे बस रोको मत टोको मत ....
मुझे अपना भविष्य बनाने दो ना
इस बात को अपनी गुड़िया के लिए समझो ना।
