STORYMIRROR

Hrishi Camble

Others

3  

Hrishi Camble

Others

रौशनी

रौशनी

1 min
335


रूठा अगर कभी तो रोने नहीं देती

बना बनाया काम ये होने नहीं देती


है ख़्वाबों को मेरी नींद का इंतज़ार

हकीक़त है की मुझे सोने नहीं देती


है सुनाती ये रात रोज़ बीती कहानी

इश्क़ का नया बीज़ बोने नहीं देती


सोचता हूँ के भाग जाऊँ ज़माने से दूर

लौटने की आदत मुझे खोने नहीं देती


है कोई जगह अश्क बहाने को बताओ

घर में फैली रौशनी मुझे कोने नहीं देती



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन