फर्क सिर्फ इतना है
फर्क सिर्फ इतना है
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दिखाई तो सबको देता है, फर्क सिर्फ इतना है,
आप मुझे देखते हो और हम आपको पढ़ते हैं।
रिश्ते बनाते तो सब हैं, फर्क सिर्फ इतना है,
आप रिश्ते निभाते हो, हम उसे जीते हैं।
शांति तो सभी को चाहिए, फर्क सिर्फ इतना है,
आप धन से शांति चाहते हैं और हम मन की
शांति चाहते हैं।
प्यार चाहते तो सब हैं, फर्क सिर्फ इतना है,
आप दूसरों में प्यार ढूंढते हो, और हम खुद से
प्यार करते हैं।
तकलीफ़ आपको भी होती हैं, तकलीफ़ हमे भी होती है
फर्क सिर्फ इतना है,
हमे दर्द आपसे मिले और हमदर्द हम आपके बने।
लिखते तो कई लोग हैं, फर्क सिर्फ इतना है,
आप शब्दों से वार करते हैं और हम शब्दों से खेलते हैं।
