फरेबी
फरेबी
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तुझे लगता है कि तेरा झूठ खुले आम बिकता है,
पर ये मत भूल कि ऊपर वाले को सब दिखता है।
तू कोशिशे कर ले अपने असली रंग छुपाने की ,
उस परवर दिगार के दरबार मे कुछ नही छिपता है ।
हो सकता है कि तेरी सत्ता चल जए कुछ दिनो तक,
ये समय की चाल है इसके आगे हर शख्स झुकता है ।
ऐ मौला दे मुझे इतनी शक्ति कि लड़ पाऊं फरेबियों से,
क्योंकि मैंने देखा है की कैसे सच सरे बाज़ार मिटता है।
