फरेबी
फरेबी
1 min
274
तुझे लगता है कि तेरा झूठ खुले आम बिकता है,
पर ये मत भूल कि ऊपर वाले को सब दिखता है।
तू कोशिशे कर ले अपने असली रंग छुपाने की ,
उस परवर दिगार के दरबार मे कुछ नही छिपता है ।
हो सकता है कि तेरी सत्ता चल जए कुछ दिनो तक,
ये समय की चाल है इसके आगे हर शख्स झुकता है ।
ऐ मौला दे मुझे इतनी शक्ति कि लड़ पाऊं फरेबियों से,
क्योंकि मैंने देखा है की कैसे सच सरे बाज़ार मिटता है।
