STORYMIRROR

mitali shah

Others

2  

mitali shah

Others

पहली बूँद

पहली बूँद

1 min
301

पहली बूँद की क्या बात करे

जब वह गिरती है हर वन

उपवन हो जाता हैं।

काले दिख रहे थे बादल 

जैसे कोई नैनो का काजल।


तभी गिरि एक बूंद

चोटी गोल और मटोल।

बूँद के बाद बूँद गिर रही थी

और वो रो रही थी।


तब फैला काजल देख

प्रश्न उठा मुझे एक।

क्यो रो रही थी वो

पूछने पर पता चला

वो ढूंढ रही थी किसी को।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from mitali shah