पैसा
पैसा
1 min
341
एक मामूली सा कागज़ का
टुकड़ा जिसे कहते हैं पैसा
पूछना चाहती हूँ उससे कि
तू क्यों है ऐसा
क्यों रहा है हर कोई तेरे
पीछे भाग
कर के अपनी सुकून भरी
जिंदगी का त्याग
क्यों है सिर्फ तेरा अम्बानी जी
के घर ठिकाना
और हमारे घर सिर्फ मेहमान
की तरह आना जाना
तू क्या जाने होती है कितनी
नफरत
जब मेरे माँ बाप करते हैं तेरे
लिए इतनी मेहनत
क्यों है तेरा इंसान कि औकात
से नाता
तू क्यों नहीं सुधर जाता..
