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garima bhardwaj

Others

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garima bhardwaj

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पैसा

पैसा

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एक मामूली सा कागज़ का

टुकड़ा जिसे कहते हैं पैसा 

पूछना चाहती हूँ उससे कि

तू क्यों है ऐसा


क्यों रहा है हर कोई तेरे

पीछे भाग

कर के अपनी सुकून भरी

जिंदगी का त्याग

क्यों है सिर्फ तेरा अम्बानी जी

के घर ठिकाना 

और हमारे घर सिर्फ मेहमान

की तरह आना जाना


तू क्या जाने होती है कितनी

नफरत

जब मेरे माँ बाप करते हैं तेरे

लिए इतनी मेहनत

क्यों है तेरा इंसान कि औकात

से नाता

तू क्यों नहीं सुधर जाता..

 



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