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Surjmukhi Singh

Others

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Surjmukhi Singh

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नैनों के दीपक

नैनों के दीपक

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स्वच्छ सुशोभित घर को सजाओ...

 हे मां लक्ष्मी आपको बुलाऊं....।


 दहलीज को अरमानों के दीपक से सजाऊ..

 करके अर्चना आपको बुलाऊं..।


करके की कृपा मुझ जोगन पर..,

 अपने चरण कभी मेरे घर लाना..।


गणपति -सरस्वती को भी अपने संग लाना..

 देकर हमें शुभता का वरदान बढ़ाना ..,

हमारे जीवन का मान।


दीन ,दुखी ,निर्धन को देना मां..स्नेहा रूपी वरदान

 अन धन वस्त्र तुमदायिनी...।


हरि प्रिय मां लक्ष्मी स्वरूपा..

स्वर्ण आभूषण करके धारण..।


करती हो विष्णु जी का स्मरण..

कमल प्रिय आसन तुम्हारा...।


उल्लू पक्षी तुम्हें अति प्यारा..

एक अर्चना है हमारा..।


सबको देना मां तुम सहारा..

ना रहे कोई भूखा प्यासा...।


तुम सबकी हो आशा..

न देना किसी को निराशा...।


नैनो के दीपक....।


अरमानों की थाली सजाकर 

मना रहे हैं दिवाली.…..।



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