नाज़
नाज़
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बहुत नाज़ था उसको, ताज-ए- मोहब्बत होने का।
तिनका तक न बचा, आया वक़्त जब खोने का ।।
रोशन थी दुनिया, रोशनाज़ था क़स्बा दिल का।
अंधेरों में घिर गया, आया वक़्त जब रोने का ।।
